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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
| Content Provider | SCERT Andhra Pradesh |
|---|---|
| Editor | कट्टीमनी, टी. वी. |
| Copyright Year | 2013 |
| Description | यहाँ कक्षा आठवीं की हिंदी की प्रथम भाषा की पाठ्यपुस्तक "बाल-वसंत - 3" में से लिए गए चार अध्यायों का वर्णन किया गया है I जिसके पहले अध्याय 'चिट्ठियों की अनूठी दुनिया' में लेखक पुराने ज़माने में किये जाने वाले पत्रव्यवहार और चिट्ठियों के महत्त्व के बारे में जानकारी देता है I दूसरे अध्यायरूपी कविता 'अरमान' में कवी बच्चों के कुछ कर दिखाने और कुछ बनने के अरमानों के बारे में वर्णन करता है I वहीं तीसरा अध्याय 'कामचोर' एक संयुक्त परिवार की कहानी है जिसमें उस घर के बच्चे हर छोटे-बड़े काम करने में आनाकानी करते रहते है और एक-दूसरे के ऊपर भार देने की कोशिश करते रहते है जिससे घर के बड़ों को कई बार दुविधा का सामना करना पड़ता है I आखरी चौथे अध्याय 'क्या निराश हुआ जाए' में आधुनिक भारतीय समाज में बढ़ रहे भ्रष्टाचार का कारण लोगों के उदासीन स्वभाव को मानता है I |
| Page Count | 28 |
| File Size | 693423 |
| File Format | |
| Language | Hindi |
| Publisher | Government of Andhra Pradesh |
| Publisher Date | 2013-01-01 |
| Publisher Place | Hyderabad |
| Access Restriction | Open |
| Subject Keyword | चिट्ठि दुनिया कामचोर समय |
| Alternative Title | अरमान कामचोर क्या निराश हुआ जाए |
| Content Type | Text |
| Educational Framework | Andhra Pradesh Board of Secondary Education (APBSE) |
| Educational Role | Student Teacher |
| Educational Use | Classroom Reading |
| Time Required | P2D |
| Education Level | Class V Class VI Class VII Class VIII |
| Resource Type | Book |
| Subject | Hindi Literature |